Thursday, January 13, 2011
भारत कृषि प्रधान देश में अन्न दाता की दशा
महाराष्ट्र के विधर्व में किसानो की आत्महत्याओं को लोग भूल भी नहीं पाए है और भारत का कृषि प्रधान प्रदेश मध्य प्रदेश भी किसानो की हत्याओं में नाम रोशन करने की कगार पर है। विगत ७ दिनों में ७ किसानो की आत्महत्या इस बात का प्रमाण है। किसानो के नाम पर देश भर में इतना पैसा सरकारों द्वारा दिया जाता है उसके बाद भी यदि किसान आत्महत्या करने को मजबूर है तो कही न कही सरकार की लाचारी और योजना में खामियौं को दर्शाता है। उस पर नेताओं द्वारा गैर जिम्मेदाराना बयान सिर्फ राजनीती में अपना उल्लू सीधा करने की बात होती है। मध्य प्रदेश में ख़राब फसलो के चलते कर्ज न चुका पाने की स्थिति निर्मित हो गई है इस कारण किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है। इस पर अधिकारी और नेता समस्या को समझने की बजाये उसे छुपाने की कोशिश में समय बर्बाद कर देते है। इस समस्या का सभी को मिलकर खत्म करने के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि जिन्हें ये काम करना चाहिए उनका जमीर मर चुका है।
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